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शादी के बाद शौहर का नाम अपने नाम के साथ लगाना कैसा है?

पूरा पढ़िए, और हक़ीक़त जानिए
जो औरतें शादी के बाद अपने वालिद का नाम हटाकर अपने शौहर का नाम अपने नाम के साथ लगाती हैं वह ज़रा ग़ौर करें कि यह “हराम” है।
जी हाँ, हराम है।
मिसाल के तौर पर किसी बहिन का नाम शादी से पहले “फ़ातिमा मक़सूद अली” था, उसकी शादी हुई “साजिद सिद्दीक़” से, अब उसने अपने वालिद का नाम हटाकर, नाम रख लिया “फ़ातिमा साजिद सिद्दीक़” या “फ़ातिमा साजिद”।
तो यह हराम है क्योंकि दीन ए इस्लाम इसकी इजाज़त नहीं देता कि कोई अपने वालिद का नाम हटाकर अपने शौहर का नाम या अपने शौहर के ख़ानदान का नाम अपने नाम के आगे लगाए।
यह कुफ़्फ़ार का तरीक़ा है हमें इसको अपनाने से बचना चाहिए ।
रसूलुल्लाह (स.अ.व) ने इरशाद फ़रमाया कि जिसने अपने नाम को अपने बाप के नाम के अलावा, अपने नाम में किसी दूसरे का नाम जोड़ा(जो उसका बाप नहीं) तो उस पर अल्लाह की और फ़रिश्तों की लानत है।
सुन्नन इब्ने माजा: 2599
हज़रत ए अबु ज़र (रज़िo) रिवायत करते हैं कि उन्होंने सुना कि रसूलुल्लाह (स.अ.व) ने इरशाद फ़रमा रहे थे कि अगर किसी ने अपने वालिद के सिवा अपनी शिनाख़्त किसी और से मिलाई तो उसने कुफ़्र किया और जिसने उस शख़्स से ख़ुद को जोड़ा जो उसका बाप नहीं है तो वह अपना ठिकाना जहन्नुम में बना ले।
सहीह बुख़ारी :3508
सहीह मुस्लिम :61
यह कुफ़्फ़ार का तरीक़ा था आज हमारी बहिनें बड़े शौक़ से इस अमल को अपना रही हैं।
याद रहे बाप का रिश्ता किसी नये रिश्ते के आने के बाद ख़त्म नहीं होता। और औलाद की शिनाख़्त और पहचान उसके वालिद से ही होगी।
अपने शौहर का नाम अपने नाम के साथ लगाना यह कुफ़्र और हराम का बा’इस है।
शौहर और बीवी का रिश्ता ख़ून का रिश्ता नहीं होता है और नाम सिर्फ़ ख़ून के रिश्ते से ही जोड़ा जाता है।
अगर किसी वजह से उसकी तलाक़ होती है तो इस सूरत में वह कितने नामों को बदलेगी।
अगर शौहरों का नाम अपने नाम के साथ लगाना सही होता तो रसूलुल्लाह (स.अ.व) की बीवियों ने भी अपने नामों के साथ ज़रूर लगातीं क्योंकि उनके शौहर तो दुनिया के अफ़ज़ल तरीन शख़्स थे।
हज़रत ए ख़दीजा (रज़िअल्लाहु अनहा) हमेशा ख़दीजा बिनते ख़ुवालिद रहीं।
हज़रत ए आयशा सिद्दीक़ (रज़िअल्लाहु अनहा) हमेशा आयशा बिनते अबु बक्र सिद्दीक़ रहीं।
यहाँ तक कि रसूलुल्लाह (स.अ.व) की वह बीवियां जिनके बाप काफ़िर थे आपने उनके नाम का लकब भी कभी नहीं बदला।
जैसे- सफ़िया बिन्ते हुअयी (रज़िअल्लाहु तआला अनहा)। (हुअयी यहूदी था और रसूलुल्लाह (स.अ.व) का जानी दुश्मन था)।
जन्नत में औरतों की सरदार हज़रत ए फ़ातिमा (रज़िअल्लाहु तआला अनहा) हमेशा फ़ातिमा बिन्ते मुहम्मद (स.अ.व) रहीं उन्होंने हज़रत ए अली (रज़ि) का नाम अपने नाम के साथ नहीं जोड़ा।
जिस बहिन ने भी ग़ल्ती से ऐसा किया है वह अल्लाह से सच्ची तौबा करे और अपने वालिद का नाम वापस अपने नाम के साथ जोड़ ले।
हमें अपने आमालों का हिसाब अल्लाह को देना है और यह सरासर अल्लाह और उसके रसूल (स.अ.व) की नाफ़रमानी है।
अल्लाह हमें समझने और इस पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे आमीन
ANSWER
Aurato Ka Apne Naam Ke Sath Apne Shauharo Ka Naam Zikr Karna Bila Karaahat Durust Hai.
Ummahaat Ul Momineen Ke Naam E Paak Ke Sath Bhi Zaujun Nabi ﷺ Kaha Jata Hai.
Haan Apna Nasab Tabdeel Karna Haraam Hai.
Ke Jaise Koi Shaikh Tha Shauhar Khan Hai To Apne Apko Khan Kahe.
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Khalifa E Huzoor Tajushshariah
Mufti Maqsood Akhtar Qadri
Khadim Dar Al-Ifta Ridawi Amjadi
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